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वस्तु अर सेवा लाग कायदौ (GST) री नोटिस समझो – भाग 1:विवरणी, कुल वकरौ अर उमेर लाग जमा (ITC) में मेल नीं होवणौ

वस्तु अर सेवा लाग कायदौ (GST) री नोटिस आवण रो मतलब ई जरूरी कोनी कि कारोबारी नै लाग चोरी करी है या गलत उमेर लाग जमा अथवा निवेश लाग जमा (ITC) लियो है।

आज GST री पद्धत आंकड़ां पर घणी निर्भर है।

Ø  कारोबारी आपरी निर्गत आपूर्ति GSTR-1 में बतावै है,

Ø  अर खरीद पर उपलब्ध ITC री जानकारी GSTR-2B में आवै है

Ø  लाग री देणदारी GSTR-3B में बतावै अर चुकावै है।

GST सिंहद्वार इण आंकड़ां रो आपस में सुमेळ भी करै है।

जद अलग-अलग विवरणियां में बतायेला आंकड़ा आपस में मेल नीं खावै, तो ई असंगतता GST री पद्धत या वाजबी एहलकार री नजर में आवै सकै है।

कई बार ई फरक सच में लाग कम भरवां या ज्यादा ITC लेवां कारण होवै है। पण कई बार सुधारौ-सुधारणौ, credit note, विवरणी भरतां गलती, या एक लेन-देन अलग वखतगाळै में दर्ज होवां कारण भी मेल नीं होवै।

इण कारण नोटिस आवै तो सबसे जरूरी काम है – आंकड़ां रो सही सुमेळ करनो अर फरक रो साफ कारण बतावणो।

GST नोटिस री हमारी श्रृंखला रा इण पहला भाग में हम तीन मुख्य नोटिस समझांला – ASMT-10, DRC-01B अर DRC-01C।

1. विवरणी री ऊंडी तपासणी – ASMT-10

CGST Act री Section 61 तहत वाजबी एहलकार registered taxpayer द्वारा भरायेली विवरणी अर उणसूं जुड़ी जानकारी री ऊंडी तपासणी कर सकै है। उद्देश्य ई देखणो है कि विवरणी में बतायेली जानकारी सही है अर उपलब्ध आंकड़ां सूं मेल खावै है या कोनी।

ऊंडी तपासणी में कोई असंगतता नजर आवै तो Rule 99 तहत Form GST ASMT-10 में नोटिस जारी हो सकै है। नोटिस में taxpayer नै बतायो जावै है कि कूणसी बात पर सवाल है अर उणरो जवाब मांग्यो जावै है। जहां संभव होवै, ओहदेदार संबंधित लाग, ब्याज या दूसरी रकम भी बता सकै है।

ASMT-10 केवल ITC या कुल वकरौ तक सीमित कोनी है। विवरणी अर विभाग पास उपलब्ध जानकारी में कोई ऐसी असंगतता जिणरो जवाब जरूरी हो, उण पर ASMT-10 आ सकै है।

उदाहरण: कुल वकरौ में फरक

GSTR-1 में दिखाई लागजोग निर्गत आपूर्ति ₹1.25 करोड़
GSTR-3B में लाग री देणदारी निकालतां मानेली लागजोग आपूर्ति ₹1.18 करोड़
फरक ₹7 लाख

पहली नजर में दोनूं विवरणियां में ₹7 लाख रो फरक दिखै है। पण ई अपने-आप ई साबित कोनी करै कि कारोबारी नै ₹7 लाख रो कुल वकरौ छुपायो है।

मान लो एक बीजक बाद में सुधार्यो गयो, कोई credit note बाद रा वखतगाळै में दर्ज हुयो, या कोई लेन-देन गलत वखतगाळै में चढ़ गयो। ऐसी हालत में आंकड़ो अलग दिख सकै है, भले कारोबारी नै लाग चोरी कोनी करी हो।

Taxpayer नै सबसे पहला ई निकालणो पड़ै कि फरक कूण-कूणसे लेन-देन सूं बन्यो है।

Rule 99 अनुसार taxpayer असंगतता स्वीकार करकै लागू लाग, ब्याज अर दूसरी रकम भर सकै है, या Form GST ASMT-11 में आपरो जवाब दे सकै है। अगर ओहदेदार जवाब सूं संतुष्ट होवै तो ASMT-12 द्वारा बात स्वीकार करी जावै है।

अगर जवाब संतोषजनक कोनी हो, या असंगतता स्वीकार करया बाद जरूरी सुधार कोनी करयो जावै, तो आगे री कानूनी कार्रवाई हो सकै है।

कारोबारी नै काय सुमेळ करनो चाहिजै?

सबसे पहला नोटिस में लिखेला वखतगाळौ अर सवाल उठायेला आंकड़ां नै साफ-साफ समझो।

कुल वकरौ या लाग री देणदारी में फरक होवै तो आम तौर पर इण रो सुमेळ करनो चाहिजै:

GSTR-1 ↔ GSTR-3B ↔ बही-खाता

फेर संबंधित बीजक, debit notes, credit notes, सुधारौ-सुधारणौ अर कूणसे वखतगाळै में कूणसो लेन-देन दिखायो गयो, ई सब जांचो।

सिर्फ ई लिख देवणो कि “हमारी विवरणी सही है” पर्याप्त जवाब कोनी है।

जवाब में साफ दिखणो चाहिजै:

विभाग रो आंकड़ो → कारोबारी रो आंकड़ो → फरक रो कारण → प्रमाण

ASMT-10 नै इण रूप में देखणो ज्यादा सही है कि कारोबारी नै असंगतता समझावण रो मौका मिल रह्यो है, जद तक बात बड़ी लाग-विवाद में बदलै।

2. GSTR-1 अर GSTR-3B री लाग देणदारी में मेल नीं होवणौ – DRC-01B

DRC-01B एक खास तरह रा मेल नीं होवणौ खातर है।

GSTR-1 में कारोबारी आपरी निर्गत आपूर्ति री जानकारी देवे है। GSTR-3B में उण आपूर्ति पर बनती GST री देणदारी बताई अर चुकाई जावै है।

GST सिंहद्वार GSTR-1/IFF में बतायेली देणदारी रो सुमेळ GSTR-3B में बतायेली देणदारी सूं करै है। अगर फरक तय सीमा सूं ज्यादा हो जावै, तो Form GST DRC-01B में सूचना आ सकै है।

फेर taxpayer नै DRC-01B रा Part B में उण फरक रो जवाब देवणो पड़ै है।

उदाहरण: GSTR-1 में लाग री देणदारी ज्यादा

GSTR-1 अनुसार GST देणदारी ₹9,00,000
GSTR-3B में बताई GST देणदारी ₹8,20,000
फरक ₹80,000

GST री पद्धत नै ₹80,000 रो फरक दिखै है। पण ई मान लेवणो कि पूरा ₹80,000 हर हालत में भरनो ही पड़सी, सही तरीका कोनी है। पहला उण लेन-देन रो सुमेळ जरूरी है जिणसूं फरक बन्यो।

मान लो एक बीजक गलती सूं GSTR-1 में चढ़ गयो अर बाद में सुधार दियो गयो। ऐसी हालत में taxpayer नै उण सुधार री जानकारी अर प्रमाण साथे कारण बतावणो चाहिजै।

दूसरी तरफ ई भी हो सकै है कि बीजक GSTR-1 में सही दिखायो गयो, पण उण पर बनती GST देणदारी GSTR-3B में गलती सूं छूट गई। तब वास्तव में लाग कम भरायो हो सकै है।

इणलिए एक ही ₹80,000 रो फरक दो अलग-अलग बात बतावै सकै है:

·         स्थिति 1: केवल हिसाब या विवरणी रो फरक, जिणरो सही कारण अर प्रमाण मौजूद है।

·         स्थिति 2: सच में GST कम भरायो गयो है अर सुधार जरूरी है।

इण कारण DRC-01B आवतां पहला सुमेळ करणो चाहिजै। ना तुरंत ई मानणो कि विभाग गलत है, अर ना बिना जांचे ई मानणो कि पूरा फरक लाग री देणदारी है।

कूण-कूणसा रिकॉर्ड सुमेळ करनो चाहिजै?

GSTR-1 → GSTR-3B → बीजक → सुधारौ-सुधारणौ → Debit/Credit Notes → बही-खाता

GST सिंहद्वार पर GSTR-1 अर GSTR-3B री लाग देणदारी रो तुलना-विवरण भी उपलब्ध है, जिणसूं संबंधित वखतगाळौ अर पूरे वित्तीय वर्ष रो फरक देख्यो जा सकै है।

अगर taxpayer फरक स्वीकार करै है, तो नियमानुसार रकम भर सकै है। अगर फरक सूं सहमत कोनी है, तो DRC-01B रा Part B में कारण बतायो जा सकै है।

DRC-01B नै नजरअंदाज करण सूं आगे री विवरणी भरवां में भी अड़चन आ सकै है। GSTN अनुसार जरूरी Part B जवाब कोनी भरया पर अगला वखतगाळौ रो GSTR-1/IFF भरयो कोनी जा सकै।

इणलिए फरक समझावण योग्य होवै, तब भी वखत पर जवाब जरूरी है।

3. GSTR-2B अर GSTR-3B में उमेर लाग जमा (ITC) रो मेल नीं होवणौ – DRC-01C

तीसरी स्थिति उमेर लाग जमा अथवा निवेश लाग जमा (ITC) सूं जुड़ी है।

GST री पद्धत GSTR-2B में दिखाई उपलब्ध ITC री तुलना GSTR-3B में taxpayer द्वारा ली गई ITC सूं करै है।

अगर GSTR-3B में ली गई ITC, GSTR-2B में दिखाई ITC सूं तय सीमा सूं ज्यादा होवै, तो Form GST DRC-01C में सूचना आ सकै है। फेर taxpayer नै Part B भरकै फरक रो जवाब देवणो पड़ै है।

उदाहरण: GSTR-2B सूं ज्यादा ITC ली गई

GSTR-2B अनुसार उपलब्ध ITC ₹6,40,000
GSTR-3B में ली गई ITC ₹7,10,000
फरक ₹70,000

GST री पद्धत नै ₹70,000 री ज्यादा ITC दिखाई दे रही है। पण सिर्फ मेल नीं होवण सूं ई पता कोनी चालै कि कारण काय है।

कारोबारी नै खरीद रजिस्टर, GSTR-2B अर GSTR-3B रो सुमेळ करकै ₹70,000 रो फरक कूण-कूणसे बीजक सूं बन्यो है, ई निकालणो चाहिजै।

मान लो एक सही बीजक नै GSTR-3B तैयार करतां गलती सूं दो बार गिण लियो गयो। तब साफ है कि ITC ज्यादा ली गई अर सुधार जरूरी है।

पण अगर फरक किसी और सही कारण सूं आयो है – जेसा कि किसी लेन-देन रो अलग वखतगाळै में दर्ज होवणो – तो taxpayer Part B में उणरो कारण समझा सकै है।

GSTN री पद्धत अनुसार taxpayer फरक री रकम भरवां री जानकारी दे सकै है, फरक रो कारण समझा सकै है, या जरूरत होवै तो दोनूं बात साथ में बता सकै है।

ITC में मेल नीं होवणौ अर नकली ITC एक ही बात कोनी

GSTR-2B अर GSTR-3B में ITC रो मेल नीं होवणौ सिर्फ ई बतावै है कि दोनूं जगह रा आंकड़ा मेल कोनी खावै अर सुमेळ जरूरी है।

सिर्फ फरक होवण सूं ई साबित कोनी होवै कि taxpayer नै नकली बीजक बनायो या धोखे सूं ITC लियो।

ऐसी स्थिति भी हो सकै है जद आंकड़ा पूरा मेल खावै, पण कायदौ अनुसार ITC लेवण री पात्रता पर सवाल उठै। उदाहरण खातर कोई खर्च blocked credit में आवै सकै है।

कई बार खरीदार अर विक्रेता दोनूं असली होवै, लेन-देन भी असली होवै, पण बाद में विक्रेता GST भरवां बंद कर दे, कारोबार बंद कर दे या मिलै कोनी। ऐसी हालत में खरीदार री ITC पर अलग तरह रो विवाद उठ सकै है।

इणसूं अलग गंभीर मामला वो है जठे विभाग ई आरोप लगावै कि बीजक या असल लेन-देन ही झूठो हतो।

इण सब स्थिति नै एक समान ITC mismatch मानणो सही कोनी है। पात्रता, विक्रेता री बाद री गलती अर धोखाधड़ी रा मामले श्रृंखला रा अलग भाग में समझाया जासी।

DRC-01C नै नजरअंदाज करया तो काय हो सकै?

Taxpayer नै फरक रो सुमेळ करकै DRC-01C रो Part B भरनो जरूरी है।

GSTN अनुसार जवाब कोनी भरया पर अगला वखतगाळौ रो GSTR-1/IFF भरवां पर रोक आवै सकै है।

इरो मतलब ई है कि कारोबारी पास सही कारण होवै तब भी सूचना नै छोड़ देवणो ठीक कोनी है।

व्यावहारिक रूप में सुमेळ इण क्रम सूं शुरू करणो उपयोगी है:

GSTR-2B → GSTR-3B → खरीद रजिस्टर → अलग-अलग बीजक

फरक मिल जावण बाद taxpayer तय कर सकै है कि रकम भरनी या ITC वापस करणी है, कारण समझावणो है, या दोनूं में सूं जो लागू हो वो करणो है।

GST में मेल नीं होवण री नोटिस आवै तो काय करणो?

ई तीनूं नोटिस अलग उद्देश्य खातर है, पण जवाब देवण रो आधार लगभग एक समान है।

सबसे पहला नोटिस में लिखेलो वखतगाळौ अर ठीक कूणसी असंगतता बताई गई है, ई समझो।

दूसरो, विभाग रो हिसाब आप खुद फेर सूं निकालो। बिना जांचे ना ई मानो कि GST री पद्धत गलत है, अर ना ई कि उणरो आंकड़ो हर हालत में अंतिम सही है।

तीसरो, संबंधित विवरणियां नै बही-खाता अर लेन-देन रा दस्तावेज सूं सुमेळ करो।

चौथो, ई तय करो कि बात सिर्फ हिसाब या विवरणी रा फरक री है, सच में लाग या ITC री गलती है, या लेन-देन री कानूनी स्थिति पर विवाद है।

अंत में नोटिस में पूछेली खास असंगतता रो जवाब कारण, हिसाब अर प्रमाण साथे दो।

उद्देश्य सिर्फ जवाब जमा करणो कोनी है। जवाब ऐसो होणो चाहिजै जिणसूं ओहदेदार समझ सकै कि फरक क्यूं आयो अर उणरो सही समाधान काय है।

मेल नीं होवणौ अपने-आप लाग चोरी साबित कोनी करै

GST री पद्धत अलग-अलग विवरणियां में बतायेली लाग देणदारी अर ITC रो सुमेळ जल्दी कर सकै है। इण कारण असंगतता जल्दी सामने आवै है।

पण फरक मिलणो जांच री शुरुआत है, दोष साबित होवणो कोनी।

₹1 लाख रो फरक सच में ₹1 लाख कम लाग भरवां कारण हो सकै है। पण वो बीजक में सुधारौ, credit note री अलग entry या लेन-देन दूसरे वखतगाळै में दिखावण कारण भी हो सकै है।

ई बात सही सुमेळ अर प्रमाण सूं साफ होवै है।

इणलिए कारोबार नै GSTR-1, GSTR-3B, GSTR-2B अर बही-खाता रो नियमित सुमेळ करतां रहणो चाहिजै।

अगर फरक कारोबार खुद वखत रहते पकड़ ले, तो कारण निकालण अर सुधार करणो आसान होवै है। अगर विभाग पहला पकड़ै, तो वही काम नोटिस रो जवाब देवतां करणो पड़ै है।

आखिर में मूल सवाल एक ही रहै है – फरक क्यूं आयो अर कारोबार आपरा रिकॉर्ड सूं उणरो कारण साबित कर सकै है या कोनी?

प्रकाशन खातर मेटा जानकारी

SEO शीर्षक GST नोटिस समझो – भाग 1: ASMT-10, DRC-01B अर DRC-01C
Meta Title GST Mismatch Notices: ASMT-10, DRC-01B अर DRC-01C
Meta Description ASMT-10 री ऊंडी तपासणी, GSTR-1 अर GSTR-3B री लाग देणदारी में मेल नीं होवणौ अर GSTR-2B अर GSTR-3B री ITC में फरक नै उदाहरण सहित समझो।
URL Slug gst-notices-asmt-10-drc-01b-drc-01c-marwadi
मुख्य शब्द GST नोटिस मारवाड़ी
दूसरे मुख्य शब्द ASMT-10, DRC-01B, DRC-01C, GSTR-1 GSTR-3B, GSTR-2B GSTR-3B ITC
श्रृंखला GST Notices Explained – Part 1 | Marwadi Language Version
वर्ग GST / Indirect Tax

अस्वीकरण

ई लेख सामान्य जानकारी खातर है। किणी खास मामलै में कार्रवाई करण सूं पैलां जाणकार री सलाह लेवणी उचित है।

आधिकारिक संदर्भ

·         Central Goods and Services Tax Act, 2017 – Section 61.

·         Central Goods and Services Tax Rules, 2017 – Rule 99 and Forms ASMT-10, ASMT-11 and ASMT-12.

·         GST Portal guidance – DRC-01B.

·         GST Portal guidance – DRC-01C.

·         GST Portal guidance – comparison of liability declared and ITC claimed.

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